विनय यादव की बेईमानी

ईमान जैसे प्रदूषित वायु की तरह फैल रहा है दिल्ली और दूसरे शहरों की हवाओं में, कइयों की जान को खतरा हो लिया है। मेरी जान कल जाते-जाते बची। मैं कल गया ट्रांसपोर्ट लाइसेंस के दफ्तर में, बाइक का लाइसेंस बनवाना था। बाबू ने मुझसे पूछा- श्रीमान आप कैसे हैं। 10 मिनट में आप आवश्यक परीक्षाएं दें और आपको आपका लाइसेंस बिना रिश्वत दे दिया जाएगा।
मैं बेहोश हो गया। सह-लाइसेंसार्थियों ने डॉक्टर के पास पहुंचाया। डॉक्टर ने मेरे परिजनों को बताया- ईमान का अटैक हो गया है इन दिनों। दिल्ली में ईमान महामारी आ गई है। पानी के दफ्तर से सौ लोग बेहोश होकर आए, जब उन्हें बताया गया कि पानी के मीटर में हेर-फेर करने की गुजारिश ना करें, हम रिश्वत लेकर मीटर में हेराफेरी नहीं करेंगे। आप मुफ्त पानी यूज करें। ये सुन लोग बेहोश हो गए।
बिजली दफ्तर से हजार लोग सदमे में आकर अस्पताल में दाखिल हुए, जब उन्हें बताया गया कि उनका बिजली का बिल पचास प्रतिशत कम हो गया है। अकस्मात ये बात झेल ना पाए वो और दिल झटका खा गया। सरकारी अस्पतालों में तो चार बंदे बेड पर ही चल बसे हार्ट अटैक से- जब ये सुना उन्होंने कि दवाएं अस्पताल से ही दी जाएंगी। बेड की चादर रोज बदली जाएगी। दवाएं अस्पताल के भ्रष्ट अफसर ना खा जाएंगे, मरीज खाएंगे। ये झटका भारी पड़ा, चार मरीजों का हार्ट फेल हो गया।
मेरा सुझाव है कि ईमान-झेलीकरण प्रक्रिया शुरू हो। पहले बिजली, पानी के दफ्तरों में रिश्वत के रेट धीमे-धीमे कम किए जाएं। यह सुनिश्चित हो कि सरकारी दफ्तरों में कर्मचारी बदतमीजी से ही बातें करेंगे, ओके गालियों का स्तर कम कर सकते हैं पर एकदम विनम्र ना बन जाएं। अस्पतालों में मरीजों से सीधे ना कहा जाए कि उन्हें दवाएं अस्पतालों से मुफ्त मिलेंगी। मरीजों के तीमारदारों को बता दिया जाए कि दवा मुफ्त है, मरीजों का ना बताया जाए। चलूं, एक सेमिनार में जाना है। विषय वही है- ईमान झेलीकरण प्रक्रिया।

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